पुस्तक के बारे में
पर्यावरण अध्ययन शिक्षण पूर्णतः डी.एल.एड. के पाठ्यक्रम पर आधारित है।
पाठ्यवस्तु को सरल एवं उदाहरण द्वारा समझाया गया है।
पुस्तक की विषयवस्तु को दैनिक जीवन से जोड़ा गया है।
विभिन्न प्रकार क्रियाकलापों द्वारा विषय वस्तु का प्रस्तुतीकरण है।
इस विषय को एकीकृत के रूप में कैसे पढ़ाएं, उस पर प्रकाश डाला गया है।
संतुलित प्रश्न पत्र बनाने के तरीके नमूने के रूप में पुस्तक में मिलेगी।
बाल केंद्रित शिक्षण विधियाँ पर्यावरण अध्ययन के लिए, कैसे प्रयोग की जाएगी, ये भी बताया गया है।
केंद्रीय पात्रता शिक्षा की तैयारी के लिए पुस्तक उपयोगी है। रचनात्मकता पर विशेष बल दिया है।
लेखकों के बारे में
डॉ. राजकुमार श्रीवास्तव ने अपना स्नातकोत्तर-भूगोल एवं शिक्षा एवं पी.एच.डी. डिग्री भूगोल विषय में अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश से प्राप्त की। ये शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों में लगभग 25 वर्षों से सामाजिक विज्ञान शिक्षण, पर्यावरण अध्ययन शिक्षण एवं भूगोल शिक्षा पर शैक्षिक कार्य कर रहे है। उन्होनें इन विषयों में विभिन्न प्रकार के शिक्षण सामग्री एवं पुस्तकें तैयार की है जो शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने देश के उच्च शैक्षिक संस्थानों में कई सेमिनार, कार्यशाला एवं कान्फ्रेंस में सम्मिलित हुए हैं। इनके सामाजिक विज्ञान एवं पर्यावरण अध्ययन पर शोध लेख, कई राष्ट्रीय स्तर के शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित है। अंत में इनका पूरा जीवन सामाजिक विज्ञान के विषय पर समर्पित है। वर्तमान में यह सहायक प्रोफेसर भूगोल विषय के रूप में डाइट-दिलशाद गार्डन में कार्यरत है।
डॉ. भारतेन्दु गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, डाइट-दिलशाद गार्डन में पिछले 18 वर्षों से विज्ञान एवं पर्यावरण शिक्षण में शैक्षणिक कार्य कर रहे है। इन्होनें विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक कार्य जैसे-सामग्री निर्माण, पाठयक्रम निर्माण, कार्यशाला आयोजित करना, अनुसंधान कार्य आदि क्षेत्रों में कार्य किए है। इनके कई शोध लेख राष्ट्रीय स्तर के शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित है। इन्होने अपनी स्नातकोत्तर डिग्री भैतिकी एवं शिक्षा में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर से प्राप्त की है। आपने शिक्षाशास्त्र में पी.एच.डी. की उपाधि और नेट परीक्षा पास की हुई है।















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