शिक्षा | Shiksha (Hindi)

Author:   Manish Sisodia

Publisher: Penguin

ISBN: 9780143448655

Original price was: ₹150.00.Current price is: ₹120.00.

Days
Hours
Minutes
Seconds

Out of stock

Cash on Delivery Available

COD is available on selected pincodes for your convenience and trust.

Fast Delivery Across India & Worldwide

We ship across India and internationally, ensuring your books reach you wherever you are.

Trusted Educational Publisher

We specialize in educational books and are dedicated to quality learning resources.

Since 1986 – A Legacy of Trust

Serving readers for over 35 years with reliable and authentic publications.

“शिक्षा” एक हिंदी उपन्यास है जिसे लेखक उषा प्रियम्वदा ने लिखा है। इस उपन्यास का प्रकाशन 1960 के दशक में हुआ था और यह एक गहरे और संवेदनशील तरीके से समाज और मानव संबंधों को दर्शाता है।

 

सारांश

“शिक्षा” उपन्यास की कहानी एक महिला, आरती, के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। आरती एक शिक्षित और स्वतंत्र विचारों वाली महिला है जो अपने परिवार और समाज के पारंपरिक दृष्टिकोण के खिलाफ संघर्ष करती है। उपन्यास की शुरुआत में, आरती एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार में जन्म लेती है और उसकी परवरिश पारंपरिक भारतीय मूल्यों के साथ होती है।

आरती की शादी विनोद नामक एक युवक से होती है, जो पेशे से इंजीनियर है। शादी के बाद, आरती को एहसास होता है कि विनोद और उसका परिवार उसकी स्वतंत्रता और शिक्षा की महत्वाकांक्षा को नहीं समझते। विनोद और उसका परिवार आरती से पारंपरिक घरेलू भूमिकाओं में ढलने की उम्मीद करते हैं, जिससे आरती को अपनी पहचान और सपनों का गला घोंटने का अहसास होता है।

आरती धीरे-धीरे समझने लगती है कि उसे अपनी पहचान और स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे। वह अपने सपनों को पूरा करने और समाज के दबावों के खिलाफ खड़े होने का निर्णय करती है। इस संघर्ष में, वह अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करती है।

मुख्य विषय

1 महिला स्वतंत्रता**: उपन्यास में महिला स्वतंत्रता और स्वाभिमान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। आरती का संघर्ष यह दर्शाता है कि किस प्रकार समाज और परिवार की पारंपरिक अपेक्षाएँ महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान को प्रभावित करती हैं।

2. शिक्षा का महत्व**: उपन्यास में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है और यह दिखाया गया है कि शिक्षा कैसे व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनाती है।

3. **पारिवारिक और सामाजिक दबाव**: “शिक्षा” में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे पारिवारिक और सामाजिक दबाव व्यक्ति की आकांक्षाओं और स्वतंत्रता को बाधित कर सकते हैं।

शैली

उषा प्रियम्वदा की लेखन शैली संवेदनशील और प्रवाहपूर्ण है। उनके लेखन में पात्रों की आंतरिक भावनाओं और संघर्षों का गहन विश्लेषण किया गया है। उनके संवाद और वर्णन में सजीवता और यथार्थता होती है, जो पाठकों को कहानी से जोड़कर रखती है।

कुल मिलाकर, “शिक्षा” एक महत्वपूर्ण हिंदी उपन्यास है जो महिला सशक्तिकरण, शिक्षा के महत्व, और समाज में महिलाओं की स्थिति पर विचार करता है। यह उपन्यास न केवल मनोरंजक है बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर सोच को प्रेरित भी करता है।

Weight 170 g
Dimensions 20 × 10 × 2 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “शिक्षा | Shiksha (Hindi)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart
Scroll to Top